गाैतम बुद्धके 101 प्रेरणादायी विचार । Gautam Buddha Inspirational Quotes in Maithili



1. .एक क्षण एक दिनके बदैल सकैए।एक दिन एक जीवनके बदैल सकैए आ एक जीवन समुच्चा दुनियाँके 

बदैल सकैए।

२.  क्रोधकेँ प्रेमसँ,बुराइकें अच्छाइसँ,स्वार्थीकेँ उदारतासँ आ झुट्ठा लोककेँ सच्चाइसँ जीतल जा सकैत छै


३. जइ व्यक्तीक मोन शान्त होइत छै,जे व्यक्ती बजैत आ अपन काज करैत समय शान्त रहैत छै,

ओ ओएह व्यक्ती हएतै जे सत्यकेँ प्राप्त कऽ लेने छै आओर दुख-कष्टसँ सदाक लेल मुक्त भऽ गेल छै।


४. जे लोक अपन जिनगी समझदारी सङ्ग जिबैत छै, ओकरा मृत्युसँ सेहो डर नइँ लगैत छै।


५. अज्ञानी मनुख एकटा बैलक समान होइत छै जे ज्ञानमे नइँ मात्र आकारमे बढैत छै।


६. क्रोधके पोसिक' रखनाइ मतलब कोइलाके ककरो दोसरपर फेकबाक लेल

पकड़िक' राखब समान अछि जे बादमे अहीँकेँ नोक्सान करत।


७. जे ईर्ष्या आ शत्रुताक आगिमे जरै छै ओकर एहि दुनियाँमे हंसी आ प्रसन्नता स्थायी नइँ भऽ सकैए।

जँ अहाँ अन्हारमे डूबल छी त इजोतक खोजी किएक नइँ करै छी।


८.  हजारटा खाली शब्दसँ महत्त्वपूर्ण ओ  एक्केटा शब्द अछि जे शान्ति लाबि सकए।


९. एकटा लोटा ठोप -ठोपसँ भरैछै।


१०.  बितलपर धियान नइँ दी।भविषयक चिन्ता नइँ करू। अपन मोनकेँ बस्स वर्तमानमे  केन्द्रीत करू।


११.  स्वास्थ सबसँ महत्वपूर्ण उपहार होइछै, संतोष सबसँ बढ़िक धन होइछै

आ इमन्दारी सबसँ नम्हर सम्बन्ध होइछै।


१२. जेना मैनवती बिनु आगिके नइँ जरि सकैत छै ई जीनगी सेहो अध्यात्म बिना नइँ चलि सकैत छै।


१३. तीनटा चिज बेसी देरतक नइँ छुपि सकैए- सूर्य,चन्द्रमा आ सत्य।


१४.  अपन मोक्ष लेल स्वयं प्रयत्न करी।दोसरपर निर्भर नइँ रही।


१५.  कोनो विवादमे जखने हमसब क्रोधित होइत छी, सत्यक मार्ग छोड़ि क’  अपन बचावमे लागि जाइत छी ।


१६.  हम कखनो ई नइँ देखैत छी जे कि कएल गेल छै। बस ई देखैत छी जे कि करबाक आब बाँकी छै।


१७.  बेसी बजनिहार व्यक्ती किछु नइँ सीख पबैत छै।समझदार व्यक्ती ओ कहाइत छै

जे क्रोध नइँ करए बला धीरज रखए बला आ नीडर होइत छै।


१८.  जे विवादित विचारसभसँ मुक्त रहैत छथि,सएह जीवनमे शान्ति पाबैत छथि


१९.  जिनगीक यात्रामे विश्वास अहाँके पोषण दैत अछि।

नीक काज एकटा घरजकाँ होइत छै।

ज्ञान दिनक इजोतजकाँ होइत छै।सजगता अहाँके सुरक्षा दैत अछि।

जँ मनुष्य शुद्ध जीवन जिबैत छै त कियो ओकरा नष्ट नइँ कऽ सकैए।


२०.  चाहे अहाँ कतबो पवित्र शब्द सुनिलिय वा कि पढिलिय मुदा

जा धरि स्वयंकेँ जीवनमे लागू नइँ करबै किछु लाभ नइँ हएत।


२१.  संसारमे कोनो चिज असगरे  नइँ रहै छै। हर एक चिजक सम्बन्ध एक दोसर चिजसँ अवस्से रहै छै।


२२.  अन्तमे इएह बात अर्थ रfखैत छै जे अहाँ कतेक नीक तरिकासँ प्रेम केलियै।

कतेक भरपूर तरिकासँ जिनगी जिलियै आ कतेक मेही ढंगसँ लोकक गल्तीके माफी देलियै।


२३.  एकटा जागल व्यक्तीके राति बड़ नम्हर लगै छै।एकटा थाकल व्यक्तीकेँ अपन लक्ष्य बड़ दूर लगै छै।

सच्चा धर्मसँ अनजान मुर्खक लेल जीवन आ मृत्यु सेहो एहने लम्बा दूरी लगै छै।


२४. दर्द तय छै।ई अहाँक हाथमे नइँ अछि मुदा दुखी भेनाइ वा नइँ भेनाइ अहाँक हाथमे  अछि।


२५. एक इमान्दार,गुणी,प्रतिष्ठित ओ धनी व्यक्ती जे जगह चुनैत छै,ओइ ठाम ओकर सम्मान कएल जाइत छै।


२६. जँ अहाँक दिशा सही अछि तखन चिन्ताक कोनो बात नइँ,

बस्स अहाँके एतेक करबाक अछि कि निरन्तर चलैत रही।


२७.  समुच्चा दुनियाँमे एतेक अन्हार नइँ छै जे ओ एकटा जरैत मैनवतीके मिटा सकतै।


२८.  अप्पन उद्धार स्वयं करी।दोसर पर निर्भर नइँ रही।


२९.  कोनो जंगली जानवरके तुलनामे एकटा कपटी आ दुष्ट मित्रसँ बेसी डेराएक चाही किएकी

जानवर त बस अहाँक शरीरके नोकसान पहुँचाएत मुदा ओ दुष्ट मित्र अहाँक बुद्धिके नोकसान पहुँचाएत।


३०.  ज्ञानी व्यक्ती कखनो नइँ मरैत छै आ जे मूर्ख छै ओ त पहिनहीसँ मरले रहैछै।


३१.  सब लोकके मृत्युसँ डर लगैत छै।सबकियो सजायसँ डेराइत छै।

तें बाँकी जीवकेँ सेहो अपनेसन समझी।ककरो हत्या नइँ करी आ दोसरोके नइँ करए दी।


३२.  अराजकतासब जटील काजमे निहीत छै।बस्स परिश्रमकेँ साथ प्रयास करैत रहबाक चाही।


३३.  असल समस्या ई छै कि अहाँके लगैत अछि जे फल्लाँ काज करबाक लेल

अहाँ लग बहुत बेसी समय अछि।


३४.  घृणा,घृणासँ नइँ प्रेमसँ समाप्त होइत छै।ई शाश्वत सत्य छै।


३५. जइ तरहे लापर्वाह रहलासँ घाससन नरम चिजक धारसँ हाथ घायल भऽ जाइछै,

ठीक ओहिना धर्मक सही पहिचान नइँ भेलासँ मनुष नरकके दरबजापर चलि जाइछै।


३६. जँ कोनो काज करैए लायक अछि त ओकरा खूब मोनसँ करु।तहने ओइमे सफलता भेटत।


३७. जँ अहाँमे हमरा जकाँ बटबाक शक्ति रहैत त अवस्से अहाँ भोजन बाटिक खाएल करितहुँ।


३८ .संसार अदौसँ प्रशंसा आ बुराइ करबाक बाट खोजैत आबिरहल छै।इहे होइत छै आ इएह होइत रहतै।


३९. जे व्यक्ती स्वयंसँ सच्चा प्रेम करैत छै।ओएह दोसरके हानी नइँ पहुँचा सकैए।


४०. अपन बराबर वा अपनासँ उच्च व्यक्तीके सङ्ग चलबाक चाही।

किएकी मूर्ख व्यकीके सङ्ग चलबाकसँ नीक छै असगर चलनाइ।


४१. हजार लडा़इ जितनाइसँ नीक छै स्वयंके जीतब।किएकी ई जीत स्वयंकेँ होइत छै।

एकरा नै स्वर्गदूत,नै राक्षस वा नै स्वर्ग-नर्कमे कियो ल’ सकैत छै।


४२. शान्ति प्रिय लोक शान्तिसँ अपन जिनगी जिबैत छै।ओकरापर जीत वा हारक कोनो प्रभाव नइँ पडैत छै।


४३. जीवनमे कोनो  चिज स्थायी नइँ होइत छै।


४४. जेना एकटा मैनवती हजारो मैनवतीके नेस सकैए मुदा तइयो ओकर उमेर कम नइँ होइत छै

ठीक तहिना खुशी बटलासँ कम नइँ होइत छै।


४५. अहाँ ओकरे हरबैत छी जकरामे बेसी  लागल रहैत छी।


४६. ईर्ष्या आओर शत्रुताक आगिमे जरएबला मनुख चाहे कतबो कोसिस कऽ लए

ओ सच्चा खुशी नइँ पाबि सकैए।


४७. हमसब जे बजैत छी ओइ शब्दक चयन बहुत सावधानीसँ करबाक चाही

किएकी सुन' बला व्यक्तीपर ओकर प्रभाव अवस्से पडैत छै।चाहे ओ सही होइक वा गलत ।


४८. पित्तके अपन भीतर रखनाइ ठीक ओहिना छै

जेना जहर अहाँ स्वयं पिबू आ मरबाक अपेक्षा ककरो दोसरसँ करु।


४९. ई सोचनाइ एकदसँ हस्यास्पद छै जे कि कियो दोसरगोटे अहाँकेँ सुख आ दुख द' सकैए।


५०. अपन मोनके नीक काज करैएमे लगाबी।एकरा बेर-बेर करैत रहु।देखबै जे अहाँ खुशीसँ भरि जाएब।


५१.अहाँक शरीरके स्वस्थ राखब अहाँक कर्तव्य अछि नइँ तँ अहाँ अपन मोनके मजबूत

आ स्पष्ट नइँ राखि सकैत छी।



५२. खराबी अवश्य रहबाक चाही,तखने  नीक एकर उपर अपन पवित्रता प्रमाणित करतै।


५३.एकटा मूर्ख व्यक्ति एकटा बुद्धिमान व्यक्तिके सङ्ग रहियो क’ 

अपन भरि जिवनमे सत्यकेँ नइँ देखि पबैत छथि, 

जेना एकटा चम्मस रसके स्वाद नइँ ल पबैत छै ।


५४. विचलित मोन भेलहा व्यक्तिकेँ मृत्यु ओहने बहाएक ल जाइ छै,

जेना अनचोकेमे आएल बाढ़िमे गामके लोक सुतले सुतल बहि जाइ छथि।



५५.  प्रत्येक दिनन नयाँ दिन होइ छै,एहिसँ कोनो फर्क नइँ पड़ैत छै 

कि  बितलाहा दिन कतेक मुश्किल रहैए।अहाँ सदैव एकटा नयाँ सुरूवात करि सकैत छियै।

 

५६. मुनख्खकेँ एकटा बन्धन मुक्त मनके निर्माण करबाक चाही,जे उपर,नीचा आ चारू कात पसरल रहै।

उहो बिना कोनो बन्धके ,बिना केकरोसँ दुश्मनीके,बिना केकरोसँ बदला भावके ।

 

५७. जँ अहाँक चित्त शान्त अछि, तखने अहाँ ब्रह्माण्डके प्रवाहके सुनि पाएब,

एकर लय तालकेँ महसुस कर’ पाएब।खुशी एकर अगल बगल रहैत छै आ धीयान एकर चाबी छियै।

 

५८. जँ अहाँ ओहि चीजकेँ आदर नइँ करै छियै  जे अहाँ लग अछि, तँ अहाँकेँ कहियो खुशी नइँ मिलत।

 

५९.एक अनुशासन बिहिन मन जतेक अवज्ञाकारी किछो नइँ होइ छै।

ओहिना एक अनुशासित मन जतेक आज्ञाकारी किछो नइँ  छै।

सत्यकेँ अपन आधार बनाउ,सत्यकेँ अपन घर बनाउ।

किएक कि दुनियामे एहिसँ नम्हर कोनो घर नइँ अछि।


६०. जँ अहाँ केकरो दोसर लेल दीप बारैए छियै तँ ई अहूँके रस्ताकेँ इजोत करि दैत छै।


६१.अहाँके बड़कोसँ  बड़का दुश्मन ओतेक हानी नइँ करि सकत,

जते हानी अहाँके अनियन्त्रित विचार अहाँकेँ पहुचाबैत अछि।


  ६२. अहाँ दोसरकेँ जतेक प्रेम करैए छियै ओतबेक अपनोसँ करू 


  ६३. सभटा खराब काम मनके कारण उत्पन्न होइ छै।

 जँ मने परिवर्तन भ’ जाएत तँ कि अनैतिक काम भ’ सकै छै ?

 

६४. सब पापसँ दूर रहैएके लेल,नीक व्यवहारकेँ विकास करू आओर अपन मनमे नीक विचार राखू



६५. सत्यके मार्गमे चलैत काल व्यक्ति दूटा गलतिसभ क’ सकैत छथि।

एक पूरा रस्ता नइँ चलनाइ दोसर एकर सुरूवातो नइँ करनाइ।

 

६६. जा धरि अहाँके मनमे विवादित विचार पोषित होइत रहत ता धरि अहाँकेँ रिसो बनल रहत।

मुदा जखने अहाँ विवादित विचारकेँ बिसरा देबैए तखने अहाँके रिस गायब भ’ जाएत ।


६७. इच्छासभके कहियो अन्त नइँ हएत।जँ अहाँ कोनो एकटा इच्छा पूरा भइयो जाएत,

तँ दोसर इच्छा तुरत जन्म ल’ लएत।


६८. एकटा बुद्धमान व्यक्ति अपन भितरिया कमजोरीके ओहिने दूर करि लैत छथि ,

जाहि तरहेँ एकटा स्वर्णकार चान्दीके अशुद्धिसभकेँ चुनि चुनिके ,कमे-कम करि करिके आ

  एहि प्रक्रियाकेँ बेर बेर दोहरा तेहराके दूर करि लैत छै।


६९.  ओ हमर अपमान कएलकै,हमरा कष्ट देलकै,हमरा लुटि लेलकै,

जे व्यक्ति जीवन भरि इहे बातसभकेँ शिकायत करैत रहै छै,

ओ कहियो चैनसँ नइँ रहि पाबैत छथि।

संतृष्टीसँ ओएह रहि सकैत छै,जे स्वंयके एहि बातसभसँ उपर उठा लैत छै। 

 

७०. यदि कनियो आरामकेँ  छोड़लासा व्यक्ति एकटा बड़का खुशिकेँ देखि पाबै छै,

त एक समझदार व्यक्तिकेँ चाही कि ओ कनियेँ आरामकेँ छोड़ि बड़का खुशीकेँ प्राप्त करि सकैए।


७१. जँ अहाँ समस्याके समाधान निकालि सकैत छी,तँ फेर चिन्ता किए ? 

आ जँ समस्याके कोनो समाधान नइँ छै,तँ फेर चिन्ता करैएके कोनो फयदा नइँ अछि।



७२. एहि आन्हर दुनियामे हम अमरताके ढोल पिट रहल छी ।



७३. खराब काम करैएबला व्यक्ति एहि संसारमे तँ शोक मनाबे करै छै, 

उ अगिलो  जन्ममे शोक मनाबै छै।उ दूनुमे शोक मनाबै छै।

७४. दुनिया ईहे नइँ जानैत छै की एक अपनासभके अन्त एहि ठाम हएबाक छै।

मुदा जे कियो ई सत्यकेँ जानैत छथि , हुनकर झगड़ा एके बेरमे समाप्त भ’ जाइत छै ।



७५. विश्वासके बिना अहाँ कतौ नइँ पहुँच सकबैए,एहिदुवारे जँ अहाँ धर्मके पाबैए चाहै छियै

 तँ विश्वास बहुत जरूरी अछि।


७६. अस्तित्वके पूरा रहस्य अछि डरसँ मुक्ति । कहियो एहि बातसँ नइँ डरू कि अहाँके कि हएत ?

 केकरोपर निर्भर नइँ रहु। जखन अहाँ सब तरहक मदतके अस्विकार करि दैत छियै, 

तखदे अहाँ सही अर्थमे मुक्त भ’ जाइ छियै


७७.  जे व्यक्ति जीवनमे मात्र सुखके खोज करैत छै,जकर इन्द्रियसभ अनियन्त्रि छै,जे खाएके लेल जिबैैए छै ,

उ आलसी आ कमजोर अछि।लाचल ओकरा ओहिना गिराबैए छै,जेना कि

 बिहाड़ि एकटा कमजोर गाछिके गिरा दैत छै।


७८. खुशी आ नीक स्वास्थ्य बितल बातसभकेँ बिसरि जएनाइसँ बेसी किछु नइँ अछि।


७९. जे व्यक्तिकेँ रिस उठैएपर अपन रिसके सम्हारि सकैए छै ,उ कुशल ड्राइभरे जकाँ होइ छै।

जे एना नइँ करि पाबैए छै,से अपन सीटपर बैसल दुर्घटनाके प्रतिक्षा करि रहल रहैए छै


८०. जँ कोनो व्यक्तिसँ गलती भ जाइ छै ,त प्रयास करू जे  ओकरा नइँ दोहराउ।

ओहिमे मज्जा नइँ लिअ ।किएकी खराबीमे डुबल रहनाइ दु :खकेँ न्योत देनाइ होइ छै।



८१. जीह तेज चक्कू जकाँ अछि, ई बिना खुन निकालने मारि दैत छै।



 ८२ .जकर मन एकाग्र रहै छै वएह चीजसभकेँ वास्तविक स्वरूपमे देखि पाबै छै।


८३.  अपनासभकेँ अपनेसँ कएल गलतीके सजाय भलेहि तुरत नइँ मिलै,मुदा

 समयके सङ्ग किहियो न कहियो जरूर मिलै छै। 


८४. जेनाक एकटा तीर बेचैएबला अपन तीरके सीधा करैए छै।

तहिना एकटा समझदार व्यक्ति स्वंयमकेँ साधि लैत छथि।


८५. व्यक्ति स्वंयमे अपनसभसँ बड़का रक्षक भ सकैत छै ,आओर के हुनकर रक्षा करि सकैत छै ? 

जँ अहाँकेँ स्वंयमपर पूरा नियन्त्रण अछि,तँ अहाँकेँ उ क्षमता प्राप्त हएत जे बहुत कमे लोककेँ प्राप्त होइ छै।


 ८६. शान्ति भितरसँ आबैत छै,एकर बाहर खोजी कएनाइ व्यर्थ अछि।


 ८७. स्वंयमकेँ जीतनाइ दोसरकेँ जीतनाइसँ बेसी कठीन काम छियै।


८८. जाहि व्यक्तिके विचार गन्दा छै,जे लापरवाह छै आओर धोखासँ भरल छै,

उ गेरूआ वस्त्र कोना पहिर सकैए ? 

उ व्यक्ति जे स्वंयमपर विजय प्राप्त करि लेने छथि,

स्पष्ट छथि,सच्चा छथि वएह गेरूआ वस्त्र पहिरैके लायक छथि।


८९. देखैत समय मात्र देखू,सुनैत समय मात्र सुनू,महशुस करैत काल मात्र महशुस करू 

आ सोचैत समय मात्र सोचू । एहि वास्तविक कर्म छियै।


९०. कोनो व्यक्ति केश कटाबैसँ ,अथवा विशेष परिवारसँ,

कोनो विशेष जातिमे जन्म लेलासँ सन्त नइँ बनि जाइ छै।

 जाहि व्यक्तिमे सत्य ,विवेक छै वएह सन्त छथि।


९१. हमसभ जे किछो छियै से अपनासभ आइ धरि की सोचलियै एकर परिणाम छियै।

जँ कोनो व्यक्ति खराब सोचके सङ्ग बोलैए अथवा काम करैए,तँ हुनका कष्टे मिलैत अछि।

जँ कोनो व्यक्ति शुद्ध विचारके सङ्ग बोलैए अथवा काम करैए,

तँ हुनकर छाह जकाँ खुशी साथ कहियो नइँ छोड़ैत अछि।


९२. शंकाके आदतसँ भयावह किछो नइँ छै,शंका लोककेँ अगल करै छै।

ई एकटा एहन विष छियै जे मित्रता समाप्त करै छै आओर सम्बधंकेँ तोड़ैत छै,

ई एकटा काँट छियै जे दर्द दैत छै,एक तलवार छियै जे वध करै छै।


९३. खुशी, अहाँ लग बहुत बेसी रहैएके बारेमे नइँ अछि, खुशी बहुत बेसी दैएके बारेमे अछि


९४. सभसँ अन्हारिया राति अज्ञानता छियै

        

९५. चलू उपर उठू आ आभारी रहू,किएकी यदि अहाँ बहुत बेसी नहियो तइयो किछु तँ सिखलियै,

आ यदि अहाँ किछो नइँ सिखलियै, तँ कमसँ कम बेमार तँ नइँ भेलियै ,

 आओर यदि बेमार भेलियै त कमसँ कम अहाँ मरलियै त नइँ, 

एहि लेल चलू अपनासभ कियो आभारी रहू।


९६. जे अहाँ सोचै छियै सएह अहाँ बनि जाइ छियै



९७. पहुँचैएसँ बेसी जरूरी अछि ठीकसँ यात्रा कएनाइ 


९८. प्रत्येक भोरमे हमसभ पूण:जन्म लैत छियै,हमसभ आइ कि करैत छियै सएह बेसी मतलब राखैत अछि। 


९९. जूनून जकाँ कोनो आगि नइँ छै,घृणा जकाँ कोनो दुष्टता नइँ छै,

मूर्खता जकाँ कोनो जाल नइँ छै,लोभ जकाँ कोनो धार नइँ छै। 


१००.  सब किछु समझैएके अर्थ अछि सब किछु माफ करि देनाइ।

१०१. अपन क्षमतासँ काम करू , दोसरपर निर्भर नइँ रहू ।



أحدث أقدم